
सनातन सप्तऋषि अखाड़े की आधिकारिक घोषणा और उद्घाटन 26 अगस्त 2025 को नई दिल्ली स्थित खाटू श्याम दिल्ली धाम में किया गया था। इस ऐतिहासिक समारोह के दौरान सप्तऋषि धाम का शिलान्यास भी संपन्न हुआ। इसे सनातन संस्कृति के जागरण और प्रसार का नया केंद्र माना जा रहा है।
खाटू श्याम दिल्ली धाम में ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण दर्ज हुआ। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने सनातन सप्तऋषि अखाड़े की औपचारिक घोषणा और उद्घाटन किया। सैकड़ों संतों, विद्वानों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की। समारोह में महापंडित चंद्रमणि मिश्रा को आचार्य महामंडलेश्वर और
घनश्याम गुप्ता जावेरी को अखाड़े का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। शोभायात्रा और मंगल वचनों से पूरा वातावरण भावविभोर हो उठा।
कार्यक्रम में महंत राम रतन गिरि महाराज, ललितानंद गिरि महाराज, महस्वरूप महाराज, धर्मदेव महाराज, स्वामी कृष्ण नंद परमहंस (कालिदास महाराज) और डॉ. नरेश चंद शास्त्री सहित अनेक संत उपस्थित हुए। रवींद्र पुरी महाराज ने संतों का सम्मान करते हुए सप्तऋषि धाम की आधारशिला रखी। इसे आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, यह धाम आने वाली पीढ़ियों को सनातन संस्कृति से जोड़ेगा।
सनातन सप्तऋषि अखाड़ा भारतीय सनातन परंपरा का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संगठन माना जाता है, जो साधु-संतों की तपस्या, वैराग्य और धर्म रक्षा की परंपरा को आगे बढ़ाता है। “सप्तऋषि” शब्द का अर्थ उन सात महान ऋषियों से है—जैसे वशिष्ठ, विश्वामित्र, अत्रि, कश्यप, गौतम, जमदग्नि और भरद्वाज—जिन्होंने वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का आधार स्थापित किया।
अखाड़े का उद्देश्य
सनातन सप्तऋषि अखाड़ा का मुख्य उद्देश्य है:
सनातन धर्म की रक्षा और प्रचार
साधु-संतों को एक संगठित मंच प्रदान करना
योग, तपस्या और वेद-शास्त्रों के अध्ययन को बढ़ावा देना
समाज को आध्यात्मिक और नैतिक मार्गदर्शन देना
परंपरा और पहचान
अखाड़ों की परंपरा भारत में प्राचीन समय से चली आ रही है, खासकर कुंभ मेला में इनकी विशेष भूमिका होती है। विभिन्न अखाड़े शाही स्नान में भाग लेते हैं और अपनी-अपनी परंपराओं का प्रदर्शन करते हैं।



